रोज सुबह आँख खुलते ही , अन्य किसी को भी देखने से पहले अपने दोनों हाथों को देखना चाहिए और निचे दिए गए मंत्र को बोलना चाहिए.

ॐ कराग्रे वसति लक्ष्मी: करमध्ये सरस्वती। करमूले तू विष्णु: प्रभाते करदर्शनम्॥

हमारे हाथों में भगवान् ने इतनी शक्ति दे रखी है की इस सृष्टि में हम इन्ही हाथों से लक्ष्मी को अर्जित करते है, उत्तम विद्या अर्जित करते है, और इन्ही हाथों से शुधि करण, हवन , पूजा भी संपन्न की जाती है.

इसलिए हाथों के आगे के भाग में महालक्ष्मी का वास होता है, बीच (मध्य) भाग में सरस्वती जी, और हाथों के मूलभाग में स्वयं भगवान् श्री विष्णु जी का वास होता है.

इसलिए हर रोज सुबह अपने हाथों के दर्शन करके दिन की अच्छी शुरुवात करनी चाहिए.

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हर रोज पृथ्वी पर पैर रखने से पहले निचे दिए गए मंत्र का उच्चारण करना  चाहिए  तथा पृथ्वी को प्रणाम करना चाहिए.

ॐ समुद्र वसने देवि पर्वतस्तन मंडले। विष्णुपत्नी नमस्तुभ्यं पादर्स्पर्शम क्षमस्वमे॥
उपर लिखे मंत्र में धरती माँ से क्षमा याचना की गयी है. शास्त्रों में कहा गया है की हे धरती माँ मैं ना जाने रोज कितने पाप करता हूँ, मैं रोज तुझ पर चलता हूँ. और तेरा स्पर्श मेरे पैरों को रोज होता है, धरती माँ तुम फिर मेरे जैसों का बोझ उठती हो. अतः हे धरती माँ मुझे क्षमा करो.

हर रोज सुबह में स्नान के समय निचे लिखे मंत्र को पड़कर तीर्थो का आवाहन करना चाहिए.

ॐ गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती| नर्मदे सिन्धु कावेरी जलेस्मिन सन्निधि कुरु॥

शरीर शुद्धि  के लिए शरीर पैर जल छिड़कते हुए निचे लिखा मंत्र का उच्चारण करना चाहिए.
ॐ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोअपी वा |य: स्मरेत पुण्डरीकाक्षं स बाहान्तर : शुचि:॥

भोजन करते समय निचे लिखे मंत्र से आचमन करें
ॐअन्नं ब्रह्मा रसो विष्णु, भोक्ता देवो महेश्वर: 
एवं ध्यात्वा तु यो भुंक्ते सोन्नदोषान्न लिंप्यते.॥

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